B.H.D.C-134
हिंदी गद्य साहित्य
1. निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
(क) इतना जल इतनी शीतलता हृदय की प्यास न बुझी। पी सकूँगी ? नहीं तो जैसे बेला में चोट खाकर सिंधु चिल्ला उठता है, उसी के समान रोदन करूँ? या जलते हुए स्वर्ण गोलक सदृश अनंत जल में डूब कर बुझ जाऊँ ?” चम्पा के देखते-देखते पीड़ा और ज्वलन से आरक्त बिम्ब धीरे-धीरे सिंधु में चौथाई-आधा, फिर संपूर्ण विलीन हो गया। एक दीर्घ निश्वास लेकर चम्पा ने मुँह फेर लिया। देखा, तो महानाविक का बजरा उसके पास है। बुद्धगुप्त ने झुक कर हाथ बढ़ाया। चम्पा उसके सहारे बजरे पर चढ़ गयी। दोनों पास-पास बैठ गये।
(ख) बगीचे को आँख से एक साथ बहुत लोग देख सकते हैं, पर उसमें के फल नहीं खा सकते। जहाँ देखने का भी दाम लगता है या कुछ आदमियों का देखना बिना बंद किये देखा नहीं जा सकता, वहाँ दृष्टि-सम्पर्क की इच्छा भी मुश्किल में डाल देती है। पर जहाँ एक की इच्छा दूसरे की इच्छा का बाधक न होकर साधक होती है, वहाँ एक ही वस्तु का लोभ रखने वाले बहुत से लोग बड़े सद्भाव के साथ रहते हैं। लुटेरे या डाकू इसी प्रकार दल-बद्ध होकर काम करते हैं।
खंड-ख
2. हिंदी के प्रारंभिक गद्य लेखन पर प्रकाश डालिए।
3. 'त्याग-पत्र' के संरचना शिल्प का उदाहरण सहित विवेचन कीजिए।
4. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी (प्रत्येक पर लगभग 200-250 शब्दों में) लिखिए :
(क) वापसी' का कथासार
(ख) एकांकी नाटक
खंड-ग
5. 'लोभ और प्रीति' के भाव-पक्ष पर प्रकाश डालिए।
6. 'सहस्र फणों का मणि-दीप' की शैली का विश्लेषण कीजिए।
7. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी (प्रत्येक पर लगभग 200-250 शब्दों में) लिखिए :
(क) हजारी प्रसाद द्विवेदी का निबंध साहित्य
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