अन्विति से अभिप्राय यह है कि संबद्ध शब्दों के लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि में एकरूपता हो | हिन्दी वाक्यों में कर्ता या कर्म के साथ क्रिया का, संज्ञा के साथ सर्वनाम का, संबंध का संबंधी से और विशेष्य के साथ विशेषण का अन्वय होता है।
1.
कर्ता और कर्म के साथ क्रिया का अन्वय
उपर्युक्त अन्वितियों में से कर्ता या कर्म के साथ
क्रिया की अन्विति सबसे अधिक महत्वपूर्ण है और कदाचित् जटिल भी। हिन्दी में
संज्ञा पद का प्रयोग दो रूपों में होता है - एक, अविकारी
और दूसरा, विकारी। अविकारी रूप में परसर्ग नहीं होता जब कि विकारी
में परसर्ग होता है।
2
संज्ञा और सर्वनाम का अन्वय
वाक्य
में प्रयुक्त सर्वनामों के लिंग, वचन उन्हीं संज्ञाओं
के अनुसार होते हैं जिनके स्थान पर इन सर्वनामों का प्रयोग होता है; जैसे -
(क) मोहन का घर यहीं है। वह हमारे कॉलिज में पढ़ता है।
(ख) मेरे भाई आज रात को देर से घर आएँगे, क्योंकि वे सर्कस देखने गए हैं।
3.
संबंध और संबंधी का अन्वय
संबंध कारक के लिंग, वचन उसके संबंधी के अनुसार होते हैं; जैसे -
(क) यह मोहन का लड़का है। (ख) गौरव की गाड़ी टूट गई।
(ग) बिट्दू का स्वेटर काला है। (घ) यह मेरी पुस्तक है।
4.
विशेषण और विशेष्य का अन्वय
यदि
विशेष के पहले या बाद में विशेषण का प्रयोग हो तो आकारांत विशेष्य के लिंग, बचन के अनुसार प्रभावित होंगे; जैसे-
- ·
काला हाथी,
काली गाय और काले जानवर |
- ·
बड़ा लड़का,
बड़ी लड़की और बड़े लड़के।
- ·
मोटा आदमी,
मोटी औरत और मोटे बच्चे।
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1 Comments
Bhdae 182
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