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अस्तित्व संबंधी विकास या (Existernce Relatedness Growth-ईआरजी) सिद्धांत पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

 क्लेटोन पॉल अल्डर्फर एक अमरीकी वैज्ञानिक थे इन्होंने मोस्लो के आवश्यकता सिद्धान्त के पदानुक्रम का और आगे विकसित किया है जिसकी इन्होंने रचना की है इसको ई.आर.जी. सिद्धान्त के नाम से जाना जाता है। ई.आर. जी. का पूरा नाम अस्तित्व की आवश्यकता, सम्बन्धित आवश्यकताएँ और विकास की आवश्यकताएँ हैं। ई.आर.जी. निम्न स्तर की आवश्यकता से लेकर उच्च स्तर की आवश्यकता की विभिन्‍न आवश्यकताओं को प्रस्तुत करता है। इसमें आवश्यकता सिद्धान्त पदानुक्रम के साथ समानता दिखाई गई है। परन्तु इन दोनों में ई.आर.जी. सिद्धान्त के अनुसार एक से अधिक आवश्यकता के सिद्धान्त का स्तर एक ही समय में आरंभ हो सकता है या दोनों सक्रिय हो सकते हैं। ई.आर.जी. सिद्धान्त के अनुसार विद्यमान आवश्यकता के साथ-साथ आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धान्त के प्रथम दो स्तर बराबर अपना कार्य करते रहते हैं, वे सक्रिय होते हैं। ये हैं शारीरिक आवश्यकताएँ और सुरक्षा आवश्यकताएँ। ई.आर.जी. सिद्धान्त की संबद्ध आवश्यकताएँ कुछ-कुछ मॉस्‍्लो के सिद्धान्त की सम्पत्ति और प्रेम आवश्यकताओं (सामाजिक आवश्यकताएँ) से मेल खाती हैं और मॉस्लो की ही सम्मान आवश्यकता का कुछ अंश इससे मिलता-जुलता है। शेष सम्मान आवश्यकता का शेष भाग (आत्म सम्मान का भाग) और आत्म-कार्यान्‍्वयन का भाग आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धान्त ई.आर.जी. सिद्धान्त के विकास सिद्धान्त में समूहीकृत हो जाता है या यह कह सकते हैं कि इस समूह में समाहित हो जाता है। ई.आर.जी. सिद्धान्त के निहितार्थ संगठनात्मक व्यवहार की आवश्यकता भी है जैसे कि यदि उच्च व्यवस्था की आवश्यकता की संतुष्टि नहीं हो पाती है तो व्यक्ति को इसके स्थान पर निम्न स्तर की आवश्यकता को पूरी करने के लिए प्रयास करना चाहिए। उदाहरण के लिए. यदि एक कर्मचारी अपने कार्य से कार्य संतुष्टि प्राप्त करने में असमर्थ है और वह अपने पर्यवेक्षक से भी मधुर सम्बन्ध बनाकर उसका आनन्द प्राप्त भी नहीं कर सकता है, ऐसी स्थिति में वह ऊँचे वेतन मान की माँग कर सकता है।

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