वेद, उपनिषद और स्मृतियां
प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन का प्रतिनिधित्व करती हैं। महान महाकाव्य गह्मम्ारत
में वर्णित राजनीतिक विचार बहुत मिश्रित और व्यापक हैं | लेखक,
व्यास, अनिश्चित पहचान की एक पौराणिक शख्सियत
हैं | व्यास का अर्थ है विन्यासक या संकलनकर्ता | चूंकि, प्राचान समय के विभिन्न लेखकों को इतना
नामित किया गया है कि इस शब्द का प्रयोग, विशेष रूप से,
वेदों के संकलनकर्ता की उपाधि के रूप में किया जाता है जो कि
महाभारत के लेखक भी रहे हैं। जैसे हमें चौदह भिन्न मनुओं की श्रृंखला मिलती है
वैसे ही पुराण अट्टाईस व्यासों के बारे में बताते हैं जिन्होंने विभिन्न कालखंडों
में ज्ञान का संकलन किया | गहागारत के संकलनकर्ता क्रष्ण
द्वैयायन व्यास हैं और यह उनके दो पुत्रों, धृतराष्ट्र और
पांडु, के वंशर्जों का वर्णन है जिनके बीच महाभारत का
मुकाबला हुआ था| बहाग्रत एक ऐतिहासिक ग्रंथ है और कुछ
प्रसिद्ध इतिहासकार जैसे डीडी कोशाम्बी ब्रह्मभारत को एक ऐतिहासिक ग्रंथ के रूप
में स्वीकारते हैं| यह सबसे बृहद महाकाव्य है जिसका उपयोग आम
जनता को, उनके दैनिक जीवनचर्या के लिए, शिक्षित करने के लिए भी किया गया है| यह, तत्कालीन समय मेँ उपलब्ध, मौजूद ज्ञान का संकलन है| बह्मथारत राजनीति की दृष्टि से
महत्वपूर्ण है क्योंकि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिन्तन में इसकी विस्तार से चर्चा
होती है| शांतिपर्व और राजधर्मानशंसा अध्याय, प्राचीन भारत के, राजनीतिक विचार का मानव निर्मित और
व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं| महाभारत के शॉतिपर्य
में दंडनीति राजधर्म, शासन पद्धति, मंत्री
परिषद और कर व्यवस्था, राजा के कर्तव्यों और शासन प्रणाली,
सरकार के विभिन्न अंगों आदि के बारे में और अधिक चर्चा करते हैं|
शांतिपर्द एकाधिकार-राजतंत्र की उत्पत्ति के सिद्धांतों को स्थापित
करता है और यह त्रह्मभारत के शांतिषर्द में ही है जिसमें हम भीष्म के राजनीतिक
विचारों से परिचित होते हैं जो कि इस अध्याय की विषय-वर्तुहै। शांतिपर्द में भीष्म
के प्रवचनों को, राजधर्म का, उनका सबसे
ठोस वर्णन माना जाता है | युधिष्ठिर ने, महान युद्ध के अंत में, व्यास से राजाओं के साथ-साथ
चारों वर्णों के कर्तव्यों के बारे में पूछा | ऋषि ने उन्हें,
विद्वान और महान बुद्धिजीवी, भीष्म के पास
भेजा जो सभी कर्तव्यों में निपुण थे। रजप्वर्ग भीष्म के मूल विचारों की, युधिष्ठिर द्वारा की गयी विवेचनाहै | जिस प्रकार
उगता हुआ सूर्य, अपवित्र अन्धकार को,छिन्न-भिन्न
कर देता है उसी प्रकार राजधर्म, इस संसार की, सभी बुरी महत्ताओं को ध्वस्त कर देता है। शॉतिपर्व में 85 अध्याय और 13,716 छंदों की संख्या है तथा इसेऔर आगे
तीन उप-पर्वों में विभाजित किया गया हैः
(i) राजघर्गानुकांसा
पर्व: यह माग राजा के कर्तव्यों और उसके शासन का वर्णन करता है।
(ii) अर्पद्धामवुश्ासाएवयह
भाग आपातकालीन स्थिति में किये जाने वाले आचरण के नियमों का वर्णन करता है|
(iii) मोक्षघर्मपर्वथह
पर्व मोक्ष या मोक्ष प्राप्त करने के लिए किये जाने वाले व्यवहार और नियमों का
वर्णन करता है|
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