सामान्य एवं पारिमाषिक शब्दों के बीच मूल अंतर, अर्थ-संरचना के स्तर पर ही होता है। भाषा में शब्द अभिधा, लक्षणा एवं व्यंजना-शक्ति से संपन्न होता है। कोई भीव्यक्ति अपनी भाषा में, शब्द को प्रयोजन और दृष्टिकोण के अनुरूप इन अर्थों के संदर्भ में प्रयुक्त कर सकता है। विशेष तौर पर साहित्य की ही बात करें तो शब्दों का लाक्षणिक प्रयोग साहित्य को वैशिष्ट्य प्रदान करता है। जबकि पारिभाषिक शब्द में यह गुण होता है कि विषय-विशेष के संदर्भ में अभिधार्थ या एक ही अर्थ देता है. किसी अन्य संदर्भ में हम उसका वही अर्थ ग्रहण नहीं कर पाते। साहित्यिक भाषा में 'आँसुओं की नदी बहाना' लाक्षणिक अर्थ को व्यक्त करता है क्योंकि कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसकी आँखें आँसुओं की नदियाँ बहा सके। इस तरह देखा जाए तो यहाँ मूल अर्थ में विचलन लाते हुए अर्थ-विस्तार किया गया है। जबकि ज्ञान-विज्ञान के संदर्भ में 'नदी' शब्द प्रयुक्त होने पर उसका मूल अर्थ स्थिर रूप में नजर आता है। वहाँ उस स्थिति में 'नदी' का मूल अर्थ स्थिर है, उसमें वस्तुनिष्ठता है। पारिमाषिक शब्द शास्त्र-सापेक्ष होते हैं, उनके द्वारा व्यंजित अर्थ में निश्चितता एवं सूक्ष्मता होती है। पारिमाषिक शब्दावली की इस प्रकार की विशिष्टता उन्हें अर्थ के स्तर पर सामान्य शब्द से अलग पहचान देती है।
पारिभाषिक शब्द किसी व्यापार, प्रक्रिया अथवा विशिष्ट अवधारणा के अर्थ को व्यक्त करने वाले भी हो सकते हैं। जैसे, गणित में 'दशमलव', बिंदु', 'समीकरण' आदि या फिर भाषाविज्ञान में 'ध्वनि', 'स्वन', 'स्वनिम' और 'रूपिम' आदि शब्दों को देखा जा सकता है। इसी तरह से, दर्शनशास्त्र और आध्यात्मिक संदर्भों में 'माया', 'जगत', 'आत्मा', 'मोक्ष/ आदि शब्दों का उल्लेख किया जा सकता है। यह स्थिति ठोस वस्तुओं आदि के बोधक पारिभाषिक शब्दों की भी है। जैसे, रसायन विज्ञान में 'कैल्शियम', 'नाइट्रोजन', सोडियम' आदि; प्राणिविज्ञान में 'कोशिका', 'धमनी' आदि पारिभमाषिक शब्दों की है। पदार्थवाची शब्द विविध प्रकार की भौतिक वस्तुओं से संबंधित होते हैं और ऐसे शब्दों का बाहुलय प्राय: प्राकृतिक विज्ञानों की परिधि में होता है, जबकि अवधारणावाची शब्द अपेक्षाकृत अधिक सूक्ष्म और अमूर्तवाची होते हैं। इस प्रकार के शब्दों की परिभाषा देना आवश्यक होता है। इन्हें परिभाषित करने का मूल कारण यह है कि ऊपरी तौर वह शब्द-विशेष भले ही सामान्य अर्थ की प्रतीति कराए किंतु वास्तव में उसका एक अन्य निश्चित अर्थ भी होता है। जैसे भौतिकी के क्षेत्र में 'घनत्व' (densit) शब्द को भी लिया जा सकता है जिसका सामान्य अर्थ घनापन अथवा गाढ़ापन है जबकि विषय-विशेष अर्थात विज्ञान के क्षेत्र में इसका प्रयोग 'किसी वस्तु के इकाई आयतन का मात्रा' के अर्थ में होता है।
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