व्यक्तिगत तथा सामाजिक सन्दर्भों में सदैव एक अंतर्सबंध मौजूद रहता है। दोनों एक दूसरे से प्रभावित होते रहते हैं तथा एक दूसरे पर अपना प्रभाव डालते रहते हैं। “मानवीय सामाजिक व्यवहार की प्रकृति तथा उसके कारण के बीच अचन्तर्सम्बन्ध के अध्ययन को सामाजिक मनोविज्ञान कहा जाता है |।'(मीचेनेर - डलमटेर, 1999 सीघ्फ. डलमटेर, 2006:11)। महान विद्वान जी. डब्ल्यू आलपोर्ट (1954:5) सामाजिक मनोविज्ञान की परिभाषा करते समय व्यक्ति के वास्तविक, काल्पनिक अथवा दूसरों के प्रभाव से उत्पन्न विचारों, भावों तथा व्यवहारों पर विशेष रूप से जोर देते हैं। कुछ अन्य दिद्वानों द्वारा दी गयी परिभाषाओं का सार यह है कि -
“सामाजिक मनोविज्ञान एक ऐसा मनोविज्ञान है जो व्यक्ति के मन पर पड़े
सामाजिक प्रभावों का गहराई तक जाकर उद्घाटन करता है।*
बैरन और
बयनें (2007)
सामाजिक मनोविज्ञान की परिभाषा करते हुए कहते हैं कि - "यह एक
वैज्ञानिक क्षेत्र है जो मनुष्य के व्यवहार की प्रकृति तथा उसके कारणों को समझने
का प्रयास करता है।
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि “सामाजिक मनोविज्ञान सामाजिक
संदर्भ में मनुष्यों के विचारों, भावनाओं तथा व्यवहारों का
सिलसिलेवार अध्ययन है।'
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