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स्मृति के मॉडलों की व्याख्या कीजिए।

स्मृति मानव मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण मानसिक प्रक्रिया है। इसके माध्यम से व्यक्ति सीखी हुई बातों, अनुभवों, सूचनाओं और घटनाओं को अपने मस्तिष्क में संचित रखता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनः याद करता है। स्मृति के बिना सीखना, पहचानना और दैनिक जीवन के कार्य करना कठिन हो जाता है।

स्मृति का अर्थ एवं परिभाषा

स्मृति वह मानसिक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति किसी अनुभव या सूचना को ग्रहण करता है, उसे मस्तिष्क में संचित करता है तथा आवश्यकता पड़ने पर पुनः प्राप्त करता है।

स्मृति की प्रक्रिया के चार प्रमुख चरण हैं—

  1. अधिग्रहण (Encoding): सूचना को ग्रहण करके मानसिक रूप में परिवर्तित करना।
  2. धारण (Storage): सूचना को मस्तिष्क में सुरक्षित रखना।
  3. पुनः प्राप्ति (Retrieval): आवश्यकता पड़ने पर संचित सूचना को याद करना।
  4. पहचान एवं पुनःस्मरण (Recognition and Recall): पहले सीखी गई जानकारी को पहचानना या याद करना।

स्मृति के प्रमुख मॉडल

मनोवैज्ञानिकों ने स्मृति की प्रक्रिया को समझाने के लिए अनेक मॉडल प्रस्तुत किए हैं। इनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं—

1. बहु-भंडार मॉडल (Multi-Store Model)

इस मॉडल का प्रतिपादन एटकिंसन और शिफ्रिन (Atkinson and Shiffrin) ने 1968 में किया था। इसे स्मृति का तीन-भंडार मॉडल भी कहते हैं। इसके अनुसार स्मृति तीन प्रमुख भागों में विभाजित होती है—

(क) संवेदी स्मृति (Sensory Memory):

यह स्मृति का प्रारंभिक स्तर है। इसमें इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त सूचनाएँ बहुत कम समय के लिए सुरक्षित रहती हैं।

उदाहरण: किसी वस्तु को देखने के बाद उसका दृश्य कुछ क्षण तक मन में बना रहना।

(ख) अल्पकालिक स्मृति (Short-Term Memory):

इसमें सूचनाएँ थोड़े समय के लिए संचित रहती हैं। इसकी क्षमता सीमित होती है। सामान्यतः बिना दोहराव के सूचना लगभग 15 से 30 सेकंड तक रह सकती है।

उदाहरण: किसी मोबाइल नंबर को कुछ समय तक याद रखना।

(ग) दीर्घकालिक स्मृति (Long-Term Memory):

इसमें सूचनाएँ लंबे समय तक, कभी-कभी जीवनभर के लिए सुरक्षित रहती हैं।

उदाहरण: अपना नाम, बचपन की घटनाएँ तथा सीखा हुआ ज्ञान याद रखना।

2. कार्यशील स्मृति मॉडल (Working Memory Model)

इस मॉडल का प्रतिपादन बैडले और हिच (Baddeley and Hitch) ने 1974 में किया था। इसके अनुसार स्मृति केवल सूचनाओं को संग्रहित नहीं करती, बल्कि उन पर सक्रिय रूप से कार्य भी करती है।

इसके चार प्रमुख घटक हैं—

  1. केंद्रीय कार्यपालक (Central Executive): यह ध्यान और मानसिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
  2. ध्वन्यात्मक लूप (Phonological Loop): यह शब्दों और ध्वनियों से संबंधित सूचनाओं को संभालता है।
  3. दृश्य-स्थानिक स्केचपैड (Visuospatial Sketchpad): यह चित्रों, आकृतियों और स्थान संबंधी सूचनाओं को संभालता है।
  4. एपिसोडिक बफर (Episodic Buffer): यह विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को जोड़कर एक समग्र अनुभव तैयार करता है।

3. प्रसंस्करण स्तर मॉडल (Levels of Processing Model)

इस मॉडल का प्रतिपादन क्रेइक और लॉकहार्ट (Craik and Lockhart) ने 1972 में किया था।

इस सिद्धांत के अनुसार किसी सूचना को कितनी अच्छी तरह याद रखा जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस सूचना को कितनी गहराई से समझा और संसाधित किया गया है।

इसके दो प्रमुख स्तर हैं—

  • सतही प्रसंस्करण: इसमें शब्दों के आकार, रंग या ध्वनि पर ध्यान दिया जाता है।
  • गहन प्रसंस्करण: इसमें सूचना के अर्थ को समझकर उसे पुराने ज्ञान और अनुभवों से जोड़ा जाता है।

गहन प्रसंस्करण से स्मृति अधिक स्थायी बनती है।

स्मृति का महत्व

  1. ज्ञान और अनुभव को सुरक्षित रखती है।
  2. सीखने एवं समझने की क्षमता बढ़ाती है।
  3. समस्या समाधान और निर्णय लेने में सहायता करती है।
  4. व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं व्यवहार के विकास में योगदान देती है।
  5. दैनिक जीवन के कार्यों को सरल बनाती है।

निष्कर्ष

अतः स्मृति मानव जीवन की एक आवश्यक मानसिक प्रक्रिया है। स्मृति के विभिन्न मॉडल बताते हैं कि सूचनाएँ किस प्रकार ग्रहण, संचित और पुनः प्राप्त की जाती हैं। बहु-भंडार मॉडल स्मृति की संरचना को स्पष्ट करता है, कार्यशील स्मृति मॉडल मानसिक गतिविधियों को समझाता है तथा प्रसंस्करण स्तर मॉडल सूचना को गहराई से सीखने के महत्व को बताता है। शिक्षा के क्षेत्र में इन मॉडलों का विशेष महत्व है।

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