अभिप्रेरणा मनोविज्ञान की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। मनुष्य अपने जीवन में अनेक प्रकार के कार्य करता है। इन कार्यों को करने के पीछे कोई न कोई उद्देश्य, आवश्यकता, इच्छा या लक्ष्य होता है। यही आंतरिक शक्ति व्यक्ति को किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है। मनोविज्ञान में इसी शक्ति को अभिप्रेरणा (Motivation) कहा जाता है। अभिप्रेरणा व्यक्ति के व्यवहार को दिशा प्रदान करती है तथा उसे लक्ष्य प्राप्ति के लिए सक्रिय बनाती है।
1. अभिप्रेरणा का अर्थ एवं परिभाषा
अभिप्रेरणा का सामान्य अर्थ है—किसी व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करना। यह एक आंतरिक प्रक्रिया है, जो व्यक्ति के व्यवहार को प्रारंभ करती है, उसे दिशा देती है तथा लक्ष्य प्राप्ति तक बनाए रखती है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार—
- गुड (Good): अभिप्रेरणा वह प्रक्रिया है, जो व्यक्ति को किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित करती है।
- वुडवर्थ (Woodworth): अभिप्रेरणा व्यक्ति की वह अवस्था है, जो उसे किसी निश्चित लक्ष्य की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।
इस प्रकार अभिप्रेरणा व्यक्ति के व्यवहार का आधार है।
2. अभिप्रेरणा के विभिन्न प्रकार
अभिप्रेरणा को विभिन्न आधारों पर निम्नलिखित प्रकारों में विभाजित किया जाता है—
(क) आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation)
जब व्यक्ति किसी कार्य को अपनी रुचि, संतुष्टि, आनंद या आत्मसंतोष के लिए करता है, तो उसे आंतरिक अभिप्रेरणा कहते हैं।
उदाहरण: किसी विद्यार्थी का ज्ञान प्राप्त करने के लिए स्वयं अध्ययन करना, किसी व्यक्ति का शौक के कारण चित्र बनाना।
(ख) बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic Motivation)
जब व्यक्ति किसी बाहरी पुरस्कार, प्रशंसा, धन, पद, अंक या दंड से बचने के लिए कार्य करता है, तो उसे बाह्य अभिप्रेरणा कहते हैं।
उदाहरण: अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए पढ़ाई करना या वेतन पाने के लिए नौकरी करना।
(ग) सकारात्मक अभिप्रेरणा (Positive Motivation)
जब व्यक्ति को पुरस्कार, प्रशंसा, सम्मान तथा सफलता प्राप्त करने की आशा से कार्य करने की प्रेरणा मिलती है, तो इसे सकारात्मक अभिप्रेरणा कहते हैं।
उदाहरण: अच्छे प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्राप्त करने की इच्छा से मेहनत करना।
(घ) नकारात्मक अभिप्रेरणा (Negative Motivation)
जब व्यक्ति दंड, असफलता, अपमान या हानि के भय से किसी कार्य को करता है, तो इसे नकारात्मक अभिप्रेरणा कहते हैं।
उदाहरण: दंड से बचने के लिए विद्यार्थी का समय पर विद्यालय पहुँचना।
(ङ) जैविक अभिप्रेरणा (Biological Motivation)
ये अभिप्रेरणाएँ शरीर की मूलभूत शारीरिक आवश्यकताओं से संबंधित होती हैं।
उदाहरण: भूख, प्यास, नींद तथा विश्राम की आवश्यकता।
(च) सामाजिक अभिप्रेरणा (Social Motivation)
ये अभिप्रेरणाएँ समाज में रहने तथा दूसरों के साथ संबंध स्थापित करने से उत्पन्न होती हैं।
उदाहरण: प्रेम, सम्मान, प्रतिष्ठा, सामाजिक स्वीकृति तथा समूह में रहने की इच्छा।
3. अभिप्रेरणा के प्रमुख सिद्धांत
मनोवैज्ञानिकों ने अभिप्रेरणा को समझाने के लिए अनेक सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं। इनमें प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं—
(क) आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Maslow's Hierarchy of Needs Theory)
इस सिद्धांत का प्रतिपादन अमेरिकी मनोवैज्ञानिक अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) ने किया था। उनके अनुसार मनुष्य की आवश्यकताएँ एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित होती हैं। उन्होंने आवश्यकताओं को पाँच स्तरों में विभाजित किया—
- शारीरिक आवश्यकताएँ: भोजन, पानी, नींद और वस्त्र।
- सुरक्षा की आवश्यकताएँ: जीवन, स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा।
- सामाजिक आवश्यकताएँ: प्रेम, मित्रता और अपनापन।
- सम्मान की आवश्यकताएँ: प्रतिष्ठा, आत्मसम्मान और सामाजिक मान्यता।
- आत्मसिद्धि की आवश्यकता: अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास करना और जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करना।
मैस्लो के अनुसार निम्न स्तर की आवश्यकताओं की संतुष्टि के बाद व्यक्ति उच्च स्तर की आवश्यकताओं की ओर बढ़ता है।
(ख) प्रोत्साहन सिद्धांत (Incentive Theory)
इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति बाहरी पुरस्कारों और प्रोत्साहनों से प्रेरित होता है। पुरस्कार, धन, प्रशंसा, पद और सम्मान व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
उदाहरण: अच्छे अंक प्राप्त करने पर पुरस्कार मिलने की आशा से विद्यार्थी अधिक मेहनत करता है।
(ग) मूल प्रवृत्ति सिद्धांत (Instinct Theory)
इस सिद्धांत के अनुसार मनुष्य का व्यवहार कुछ जन्मजात प्रवृत्तियों से प्रभावित होता है। भूख, प्यास, आत्मरक्षा तथा मातृत्व जैसी प्रवृत्तियाँ व्यक्ति को विशेष प्रकार का व्यवहार करने के लिए प्रेरित करती हैं।
इस सिद्धांत से जुड़े प्रमुख मनोवैज्ञानिक विलियम मैकडूगल (William McDougall) थे।
(घ) चालक न्यूनीकरण सिद्धांत (Drive Reduction Theory)
इस सिद्धांत का प्रतिपादन क्लार्क हल (Clark Hull) ने किया था। इसके अनुसार जब व्यक्ति की कोई शारीरिक आवश्यकता अपूर्ण रहती है, तो उसके अंदर तनाव या चालक (Drive) उत्पन्न होता है। व्यक्ति इस तनाव को कम करने के लिए कार्य करता है।
उदाहरण: भूख लगने पर व्यक्ति भोजन करता है। भोजन करने से भूख कम होती है और शरीर में संतुलन स्थापित होता है।
(ङ) उपलब्धि अभिप्रेरणा सिद्धांत (Achievement Motivation Theory)
इस सिद्धांत का विकास डेविड मैक्लीलैंड (David McClelland) ने किया था। इसके अनुसार व्यक्ति में सफलता प्राप्त करने, प्रभाव स्थापित करने और दूसरों के साथ अच्छे संबंध बनाने की आवश्यकताएँ होती हैं।
उन्होंने तीन प्रमुख आवश्यकताओं पर बल दिया—
- उपलब्धि की आवश्यकता (Need for Achievement)।
- शक्ति की आवश्यकता (Need for Power)।
- संबंध की आवश्यकता (Need for Affiliation)।
यह सिद्धांत शिक्षा, व्यवसाय और नेतृत्व के क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है।
4. शिक्षा के क्षेत्र में अभिप्रेरणा का महत्व
शिक्षा के क्षेत्र में अभिप्रेरणा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है—
- यह विद्यार्थियों में सीखने की रुचि उत्पन्न करती है।
- अध्ययन के प्रति एकाग्रता और ध्यान बढ़ाती है।
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता विकसित करती है।
- कठिन परिस्थितियों में भी प्रयास जारी रखने की भावना पैदा करती है।
- शैक्षणिक उपलब्धि और रचनात्मकता को बढ़ावा देती है।
- विद्यार्थियों में अनुशासन तथा सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करती है।
निष्कर्ष
अंततः कहा जा सकता है कि अभिप्रेरणा मानव व्यवहार को संचालित करने वाली एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। यह व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने तथा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। अभिप्रेरणा के विभिन्न प्रकार और सिद्धांत हमें यह समझने में सहायता करते हैं कि व्यक्ति किसी विशेष परिस्थिति में किस प्रकार व्यवहार करता है। विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में अभिप्रेरणा विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता, आत्मविश्वास और सफलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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