इटली में फासीवाद के उदय के लिए कुछ मौजूदा घटनाएं और प्रवृत्तियां जिम्मेदार थीं। युद्ध में इटली की भागीदारी के मुद्दे पर 1914 में रैडिल सिंडेकेलिस्ट कन्फिडिरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन में विभाजन हो गया। सिंडेकेलिस्ट 'उत्पादकों' की आत्म मुक्ति' में विश्वास रखते थे जो राज्य सत्ता की प्राप्ति के ज़रिए नहीं बल्कि 'कारखाना स्तर पर विनियमन' द्वारा प्राप्त किया जा सकता था। समय आने पर मजदूरों के सिडिकेट या संघों को राज्य का स्थान लेना था जिन्हें उत्पादकों के आत्म शासन के औज़ार के रूप में काम करना था। फासीवाद की ओर बढ़े सिंडिकेलिस्टो ने अतिराष्ट्रवाद का अनुगमन किया और उन्होंने राष्ट्रों को प्रोलेटेरियन या प्लुटोक्रेटक (वर्ग संदर्भ में) के रूप में व्याख्यायित किया। भविष्यवादियों ने परम्परागत रीति रिवाजों और मौजूदा संस्थाओं को अस्वीकार कर दिया था और हिंसा का पक्ष लिया था। वे गति, शक्ति, मोटर और मशीन या सभी प्रकार की आधुनिक प्रौद्योगिकीय संभावनाओं से मुग्ध थे। इनके विचारों का भी काफी प्रभाव पड़ा। मुसोलिनी का नेतृत्व, और उसके जनता को लामबंद करने और राष्ट्रीय क्रांति संबंधी समाजवादी विचार और दृष्टिकोण तीसरा प्रमुख कारक था।
फासीवादियों ने आरंभ में मिलान में अपने कार्यक्रम के तहत फ़ासी डी कोमबरैटिमेन्टो (1919) की शुरुआत की जिसने गणतंत्र की स्थापना की मांग की और उग्र जनतांत्रिक और समाजवादी परिवर्तन किए जाने की आवाज़ उठाई। उन्होंने युद्ध के समय पूंजीपतियों द्वारा कमाए गए भारी मुनाफे को जब्त करने, बड़े ज्याइंट स्टॉक कम्पनियों को दबाने और भूमिहीन किसानों के लिए जमीन की मांग की। 1920 में इस कार्यक्रम से ये वामपंथी तत्व निकाल दिए गए और केवल भावनात्मक स्तर पर घोर राष्ट्रवाद, युद्ध का औचित्य और राष्ट्रीयता महानता के सरोकारों तथा समाजवादी दल के प्रति विद्वेष जैसी भावनाओं को स्थान दिया। खासकर उत्तरी और मध्य इटली-पो वैली और टसकनी-में फासीवादी दस्तों का जम्न हुआ जिसका नेतृत्व अवकाश प्राप्त सैनिकों ने किया और स्थानीय पुलिस और सेना ने समर्थन दिया। इन दस्तों का निर्माण वामपंथ के वास्तविक या दिखावटी खतरे का सामना करने के लिए किया गया। इन दस्तों का अनुशासित करने के लिए जनवरी 1923 में मुसोलिनी ने स्थानीय दस्तों को अनुशासित करने और इनके नेताओं की शक्तियों पर पाबंदी लगाने के लिए फासीवाद अर्ध-सैन्य दस्तों का निर्माण किया।
रोम में फासीवादियों ने जुलूस का जिस अव्यवस्थित ढंग से संयोजन किया (अक्टूबर 1922) उससे यह पता चलता है कि यदि राजा में निर्णय लेने की शक्ति होती और उन्हें सेना के एक भाग का मूक समर्थन न मिला होता तो उनका क्रांतिकारी विद्रोह कभी सफल नहीं होता। 29 अक्टूबर 1922 को राजा ने मुसोलिनी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जिसने सत्ता प्राप्त करने के बाद कुछ दिनों तक संवैधानिक नियमों का पालन किया | हालांकि मुसोलिनी ने यह महसूस किया कि सत्ता में बने रहने के लिए बहुवर्गीय राष्ट्रवादी आंदोलनों को भी दक्षिणपंथी ताकतों से समझौता या गठबंधन करना पड़ेगा। फरवरी 1923 में फासीवादी दल और इतालवी राष्ट्रवादी संघ (नेशनलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इटली) का विलय हो गया। सेना के अधिकारियों, शिक्षाविदों, प्रशासकों और व्यापारियों का व्यापक समर्थन प्राप्त करने के लिए रूढ़िवादी, संप्रांत, राजतंत्रीय दक्षिणपंथी दल के साथ यह विलय जरूरी था। परम्परागत संमभ्रांत वर्ग से समझौता करने की छाप फासीवाद दल और राज्य पर भी पड़ी। 1923 में एसेरबो बिल पारित करने में परम्परागत दक्षिणपंथी समूहों ने फासीवादियों को समर्थन दिया जिसमें यह प्रस्ताव किया गया कि चुनाव में एक चौथाई मत प्राप्त कर लेने पर किसी दल को अपने आप संसद में दो तिहाई सीटों का बहुमत प्राप्त हो जाएगा।
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