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प्रयोजनमूलक हिंदी और सामान्य हिंदी में अंतर

 प्रयोजनमूलक हिन्दी में प्रयोजन शब्द का अर्थ है-‘उद्देश्य’। जिस भाषा का प्रयोग किसी विशेष प्रयोजन के लिए किया जाए, उसे ‘प्रयोजनमूलक भाषा’ कहा जाता है। हिंदी में प्रयोजनमूलक हिन्दी शब्द functional language’ के रूप में प्रयुक्त किया जा रहा है, जिसका तात्पर्य है- जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपयोग में लायी जाने वाली भाषा।’ इसका प्रमुख लक्ष्य जीविकोर्पान का साधन बनना होता है। यह हिंदी साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन, कार्यालय, मीडिया, बैंक, विधि, कृषि, वाणिज्य, तकनीकी, विज्ञापन, विज्ञान, शैक्षिक आदि विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग में ली जा रही है।

विभिन्न व्यवसायों से संबंधित व्यक्तियों जैसे- डॉक्टर, वकील, पत्रकार, मीडियाकर्मी, व्यापारी, किसान, वैज्ञानिक आदि के कार्य-क्षेत्रों में प्रयुक्त भाषा ही ‘प्रयोजनमूलक’ भाषा कहलाती है। प्रयोजनमूलक हिंदी का व्यक्तिगत अर्थ है- वह हिंदी जिसका प्रयोग प्रयोजन विशेष के लिए किया जाए। साथ ही इस हिंदी के माध्यम से ज्ञान विशेष की प्राप्ति और विशिष्ट सेवात्मक क्षेत्रों में कौशल, निपुणता एवं प्राणिण्य प्राप्त करने के लिए किया जाता है। प्रयोजनमूलक भाषा का क्षेत्र सीमित होते हुए भी यह कमी भी साधन से साध्य नहीं बनती है। इसका लक्ष्य सेवा-माध्यम होता है, जो जीविकोपार्जन का साधन बनता है।

डॉ. अर्जुन चव्हाण ने प्रयोजनमूलक हिंदी के निम्नलिखित उद्देश्य बताए हैं

• हिंदी की व्यावहारिक उपयोगिता से परिचित कराना।

• स्वयं रोजगार उपलब्ध कराने में युवकों की मदद करना।

• विविध सेवा-क्षेत्रों में युवक-युवतियों को सेवा के अवसर उपलब्ध करा देना।

• रोजी-रोटी की समस्या हल करने में छात्र सक्षम हो, इस दृष्टि से उसका पाठ्यक्रम तैयार करना।

• अनुवाद कार्य को बढ़ावा देना तथा इसके जरिए सफल अनुवादक तैयार करना।

• कार्यालयों में प्रयुक्त होने वाली हिंदी भाषा का समग्र ज्ञान प्रदान करना।

सामान्य हिंदी :

प्रयोग के आधार पर हमारे समक्ष भाषा के दो रूप उपस्थित होते हैं औपचारिक भाषा रूप तथा अनौपचारिक भाषा रूप। आम बोलचाल में हम जिस भाषा का प्रयोग करते हैं, उसका रूप अनौपचारिक होता है। इस रूप में सामान्य हिंदी से तात्पर्य हिंदी के उस रूप से जिसका प्रयोग हम दैनिक कार्यों के संदर्भ में करते हैं। इसका अभ्यास हमें बचपन से ही होता है क्योंकि इसका संबंध हमारे जीवन के विभिन्न संदर्भो से ही होता है। इसके प्रयोग के लिए हमें विशिष्ट प्रयास नहीं करना पड़ता, वरन सहज रूप से जो कुछ भी हम बोलते हैं, वह इसके अंतर्गत आ जाता है।

आजकल बड़े शहरों में शिक्षित वर्ग के बीच सामान्य हिंदी का एक अलग ही स्वरूप दिखाई देने लगा है, जो हिंदी अंग्रेजी मिश्रित रूप है। वैसे तो हिंदी में अनेक अंग्रेजी शब्दों को स्वीकार कर लिया गया है तथा ये हिंदी की शब्दावली में घुलमिल भी गए हैं, परन्तु हिंदी बोलते समय बीच-बीच में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करना आज एक आम बात हो गई है। अनायास ही हिंदी का यह स्वरूप आज उभर रहा है। आप कभी दो लोगों की बातचीत को ध्यान से सुनिए तथा उस बातचीत में आए अंग्रेजी शब्दों की सूची बनाइए।

आप देखेंगे कि इस तरह की शब्दावली आपको पर्याप्त मात्रा में मिल जाएगी, विशेषरूप से शिक्षित युवावर्ग में नीचे दिए गए कुछ वाक्यों पर ध्यान दीजिए आप पायेंगे कि इस प्रकार की हिंदी का प्रयोग हर दूसरे व्यक्ति के यहाँ से सुनने को मिल जाता है

1. आज मैं स्टेशन अपने फादर को सी आफ करने मदर के साथ गई थी।

2. जब तक रिजल्ट आउट नहीं होगा, तब तक टेंशन बनी रहेगी।

3. आज का स्टूडेंट बहुत फ्रस्ट्रेटेड है। इतना हार्डवर्क करके भी कहीं एडमिशन नहीं मिलता।

4. यार, आज तो मूवी देखी जाए। डिनर बाहर ही कर लेंगे। अच्छा इंज्वायमेंट रहेगा।

5. पेपर्स जल्दी लाओ। सिंगनेचर्स करके अभी हेड भिजवाना है। थोड़ा भी डिले हो गया तो एक्सप्लानेशन कॉल हो जाएगी।

कहने का तात्पर्य यह है कि सामान्य हिंदी आम बालेचाल की हिंदी होती है जिसका प्रयोग हम अपने दैनिक जीवन में विविध संदर्भो में करते हैं। हम अपने से बड़ों से बातचीत करते हैं, अपने मित्रों से भी बात करते हैं तथा अन्य विभिन्न लोगों से बातचीत करते हैं। सामान्य बोलचाल के इस स्तर पर निश्चित रूप से हम यह भेद करते हैं। कि हम किससे बात कर रहे हैं, क्या बात कर रहे हैं तथा बात करने का प्रयोजन क्या है? पर यहाँ इतना तो स्पष्ट है कि सभी स्थितियों में हम बोलचाल के रूपों का ही इस्तेमाल करते हैं।

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