Recents in Beach

बूझत स्याम कौन तू गोरी। कहाँ रहति, काकी है बेटी, देखी तहीं कहूँ ब्रज…………………………. प्रभु रसिक-सिरोमनि, बातनि भुरइ राधिका भोरी।।

शब्दार्थ-बूझत = पूछते हैं। गोरी = युवती। खोरी= गली ब्रज-तन-ब्रज की ओर। पोरी बरामद, पौली। सवननि कानों से। नंद ढोटा-नंद के पुत्र (कृष्ण)। दधि-दही। मिलि जोरी = जोड़ी बनाकर, साथ-साथ । रसिक सिरोमनि = रस पूर्ण बातों में बहुत चतुर। बातनि-बातों के द्वारा ।

भुरई = बहका ली.राजी कर ली। भोरी = भोली,सीधी-सादी।
संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत पद कवि सूरदास द्वारा रचित है। यह उनकी अमर कृति सूरसागर में संकलित है। इस पद में कृष्ण भोली राधा को साथ खेलने-चलने को प्रेरित कर रहे हैं।

व्याख्या-एक दिन अचानक ब्रज की गली में कृष्ण की राधा से भेंट हो जाती है। वह उससे उसका परिचय पूछते हैं। हे सुंदरी! तुम कौन हो? तुम कहाँ रहती है? किसकी बेटी हो? हमने इससे पहले तुम्हें बज की गलियों में नहीं देखा । राधा उत्तर देती है- भला हमें ब्रज में आने की क्या आवश्यकता है? मैं तो अपने द्वारा पर ही खेलती रहती हूँ।

हाँ कानों से यह अवश्य सुनती रहती हूँ कि कोई नंद जी का लड़का मक्खन और दही की चोरी करता फिरता है। कृष्ण ने कहा-हम चोर ही सही, पर हम तुम्हारा क्या चुरा लेंगे। आओ साथ-साथ खेलने चलते हैं। सूरदास कहते हैं कि उनके प्रभु श्रीकृष्ण बड़े रसिक हैं। उनको मीठी-मीठी बातें बनाना खूब आता है। उन्होंने भोली-भाली राधा को भी अपने बातों से बहका लिया और दोनों साथ-साथ खेलने चल दिए।

विशेष : 

1. पद की भाषा सरस और सरल बजभाषा है।

2. शैली संवादपरक है।

3. राधा और कृष्ण के संवादों में उनकी आयु के अनुरूप सहज वार्तालाप के दर्शन होते हैं।

4. कवि ने कृष्ण को रसिक शिरोमणि बताकर मधुर व्यंग्य किया है।

Subcribe on Youtube - IGNOU SERVICE

For PDF copy of Solved Assignment

WhatsApp Us - 9113311883(Paid)

Post a Comment

0 Comments

close