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B.H.D.E-141
अस्मितामूलक विमर्श और हिंदी साहित्य
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठयक्रम पर आधारित)
पाठयक्रम कोड : बी.एच.डी.ई-141 / बी.ए.ऑनर्स
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.ई.-141 / 2024-25
कुल अंक : 100
सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। 15 अंकों के प्रश्नों के उत्तर लगभग 1000 शब्दों में और व्याख्या के उत्तर लगभग 800 शब्दों में दीजिए तथा टिप्पणी लगभग 500 शब्दों में लिखिए |
भाग-1
1. आदिवासी साहित्य की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए | 15
2. निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए |
(क) सात भाइयों के बीच
चंपा सयानी हुई |
बॉस की टहनी-सी लचक वाली
बाप की छाती पर सॉप-सी लोटती
सपनों में
काली छाया-सी डोलती
सात भाइयों के बीच
चंपा सयानी हुई।
(ख) ऐसा वर नहीं चाहिए मुझे
और उसके हाथ में मत देना मेरा हाथ
जिसके हाथों ने कभी कोई पेड़ नहीं लगाया
फसलें नहीं उगाई जिन हाथों ने
जिन हाथों ने नहीं दिया कभी किसी का साथ
किसी का बोझ नहीं उठाया ।
भाग-2
3. महात्मा ज्योतिबा फूले के वैचारिक संघर्ष को स्पष्ट कीजिए | 15
4. निम्नलिखित पद्यांश / गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए |
(क) मारे थाने दरवा बोलाइ, घरवा से हमें,
झूठइ बनावें गुनहगार |
जेलवा में मलवा उठावै मजबूर करे,
केउ नहिं सुनत गोहार |
(ख) भारतीय नारी अपने व्यावहारिक जीवन में सबसे अधिक क्षुद्र और रंक केसे रह सकी, यही आश्चर्य है। समाज ने उसे पुरुष की सहायता पर इतना निर्भर कर दिया कि उसके सारे त्याग, सारा स्नेह और संपूर्ण आत्मसमर्पण बंदी के विवश कर्तव्य के समान जान पड़ने लगे।
भाग-3
5. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए |
(क) स्त्री विमर्श
(ख) वर्ण व्यवस्था में दलित
(ग) आदिवासियों की समस्या
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