M.H.D-2
आधुनिक हिंदी काव्य
सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1. भारतेंदु की कविताओं में नवजागरण और राष्ट्रीय चेतना का समुचित विकास हुआ है, इस कथन का सोदाहरण व्याख्या कीजिए।
2. छायावादी कविता में निराला के महत्त्व को रेखांकित कीजिए।
3. नागार्जुन के काय्य में अंतर्निहित प्रगतिवादी जीवनबोध पर प्रकाश डालिए।
4. मुक्तियोध की काव्य माषा का वैशिष्ट्य बताइए।
5. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए ।
(क) चर्चा हमारी भी कभी संसार में सर्वत्र थी.
वह सद॒गुणों की कीर्ति मानो एक और कलत्र थी।
इस दुर्दशा का स्वप्न में भी क्या हमें कुछ ध्यान था?
क्या इस पतन ही को हमारा वह अतुल उत्थान भारे
उन्नत रहा होगा कभी जो हो रहा अवनत अभी,
जो हो रहा उन्नत अभी, अवनत रहा होगा कभी।
हँसते प्रथम जो पद्च हैं, तम-पंक में फँसते यही,
मुरझे पड़े रहते कुमुद जो अंत में हँसते वही।।
(ख) पशु नहीं, यीर तुम,
समर-शूर क्रूर नहीं,
काल-चक्र में दबे
आज तुम राजकुँवर। - समर-सरताज
पर, क्या है,
सब माया है - माया है,
मुक्त हो सदा ही तुम,
बाघा-विहीन बन्ध छन्द ज्यों,
डूबे आनन्द में सच्चिदानन्द रूप |
महामन्त्र ऋषियों का
अणुओ-परमाणुओं में फूँका हुआ।
(ग) यह दीप अकेला स्नेह मरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।
यह जन है : गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गायेगारे
पनडुब्बा : ये मोती सच्चे फिर कौन कूती लायेगा?े
यह समिधा : ऐसी आग हठीला बिरला सुलगायेगा।
यह अद्वितीय : यह मेरा : यह मैं स्वयं विसर्जित :
यह दीप, अकेला, स्नेह मरा
है गर्य भरा मदमाता, पर इस को भी पंक्ति को दे दो।
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