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राजनीतिक दल को परिभाषित कीजिए। एक लोकतांत्रिक राजव्यवस्था में राजनीतिक दल किस उद्देश्य की पूर्ति करते हैं?

 राजनीतिक दल व्यक्तियों का वह संगठित रूप है, जिसके सदस्य राजनीतिक इकाई के रूप मे राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए एक साथ प्रयत्नशील रहते है।

जिस प्रकार सामाजिक या आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए दल संगठित होते है, इसी प्रकार व्यक्ति अपने राजनीतिक उद्देश्यों को भी संगठन के माध्यम से प्राप्त कर सकता है। जब किसी संगठन का उद्देश्य राजनीतिक होता है तो उसे राजनीतिक दल कहा जाता है।

1. संगठन–दल को मजबूत एवं स्थायी बनाने के लिए उसमे संगठन का होना अत्यंत आवश्यक है। संगठन से तात्पर्य है कि दल के कुछ अपने लिखित एवं अलिखित नियम, उपनियम, कार्यलय, पदाधिकारी होने चाहिए। ये दल के सदस्यों को अनुशासित रखते है।

संगठन के अभाव मे दलीय अनुयायी एक बिखरी हई भीड़ मात्र होंगे और वे अपने उद्देश्यों को पूरा नही कर पाएंगे। वस्तुतः संगठन ही राजनीतिक दल की शक्ति का रहस्य है।

2. मूलभूत सिद्धांतों की एकता दल व्यक्तियों का एक ऐसा समूह होता है जिसके सदस्य सार्वजनिक प्रश्नों पर एक से विचार रखते है। इन प्रश्नों की बारीकियों पर उनमे मतभेद हो सकता है, लेकिन वे सब मौलिक सिद्धांतों पर एकमत होते है।

सिद्धांतों की एकता ही दल को ठोस आधार प्रदान करती है। सैद्धांतिक एकता के अभाव मे दल की जड़ें हिल जाएंगी और उसका विघटन हो जाएगा।

3. संवैधानिक उपायों का प्रयोग राजनीतिक दलों को अपने लक्ष्य (सत्ता प्राप्ति) की प्राप्ति के लिए सदा संवैधानिक उपायों का सहारा लेना चाहिए। जो असंवैधानिक उपायों का अनुसरण करते है अथवा हिंसात्मक साधनों को अपनाते है, उन्हें राजनीतिक दल नही कहा जा सकता।

4. राष्ट्रीय हित की वृद्धि–राजनीतिक दल एक ऐसा समुदाय है जो उच्च आदर्शों से अनुप्राणित होता है और जिसके कार्यक्रमों और नीतियों का देशव्यापी आधार होता है क्षेत्रीय अथवा साम्प्रदायिक नही।

उसे किसी विशेष जाति, धर्म, सम्प्रदाय या वर्ग के हित की अपेक्षा राष्ट्रीय हित की अभिवृद्धि हेतु चेष्टा करनी चाहिए। यदि कोई संगठन वर्ग, जाति या सम्प्रदाय विशेष का हित साधन करते है तो यथार्थ मे उन्हें राजनीतिक दल नही कहा जा सकता।

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