राजभाषा संबंधी सांविधिक और असांविधिक उपबंधों के क्रियान्बयन हेतु 27 अप्रैल, 1960 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक आदेश जारी किया गया, जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सेवा में रहते हुए हिंदी में प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था की गई। इस आदेश का यह फल हुआ कि हिंदी तो कर्मचारियों को सिखाई ही गई, साथ ही इनके लिए अनुवाद प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई। इसी के तहत अनुवाद में सरलता, सहजता और शब्दावली निर्माण में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 1973 से अनुवाद प्रशिक्षण का कार्य भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के अंतर्गत काम कर रहे “केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो' को सौंपा गया। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुवाद प्रशिक्षण के लिए केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो एकमात्र संस्था है, जहाँ सरकारी कर्मचारियों को अनुवाद की प्रक्रिया और सिद्धांत से अवगत कराने के लिए अनुवाद प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम घलाया जाता है। केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो के कार्यालय दिल्ली के अतिरिक्त कोलकाता, मुंबई और बंगलूरू में भी हैं।
केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो द्वारा
अनुवाद प्रशिक्षण केंद्रीय सरकार के मंत्रालयों ,/ विमागों
के अनुवाद कार्य से संबंधित सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है। ब्यूरो (1)
त्रैमासिक अनुवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम (2) इक्कीस
दिवसीय अनुवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम, और (3) उच्च-स्तरीय,/ पुनश्चर्या अनुवाद प्रशिक्षण
पाठ्यक्रम (पाँच दिवसीय) चला रहा है। इसके अलावा ब्यूरो द्वारा विभिन्न
कार्यालयों में जाकर भी अनुवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ये हैं -
(क) पाँच दिवसीय संक्षिप्त अनुवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम, और
(ख) वैज्ञानिकों के पाँच-दिवसीय अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रम | उच्च-स्तरीय / पुनश्चर्या अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (पाँच दिवसीय)
फिलहाल ब्यूरो के मुख्यालय (नई दिल्ली) में ही संचालित किए जाते हैं जिसमें विभिन्न
कार्यालयों से संबंधित प्रशिक्षु दिल्ली से बाहर के भी होते हैं। उनके लिए
छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। यदि किसी शहर के कार्यालय में अनुवाद
प्रशिक्षण कार्यक्रम कराया जाता है तो अनुवाद ब्यूरो से वहाँ प्रशिक्षण के लिए
अधिकारी भेजने की भी व्यवस्था है।
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